Sep 16, 2009

एक अनुरो़ध सभी से

देश की राजनीती मेंलगातार एक नया मोड़ आ रहा है .हर राज्य की स्थिति तो ठीक थक ही लग रही हैलेकिन १५ नवम्बर को बने राज्य झारखण्ड की स्थिति बहुत ही विकटहै .लगातार सत्ता परिवर्तन के कारण येःराज्य सबसे ज्यादा खनिज होने के बाबजूद सबसे पिछाडा हुआ है .यहाँ की स्थिति सारा कुछ बता देते है येः राज्य सिर्फ़ धन कमाने का एक जरिए हो गया है .यहाँ के मंत्री तो अरबपति हो बाते है चाएःजनता को कुछ भी हो इनका सारा धयान तो बस एक जगह धन के खदान पर लगा हुआ है । बात अगर यहाँ के इंडस्ट्री की करे तो टाटा जैसी कंपनिया यही है.लेकिन फिर भी सबसे ज्यादा गरीब लोग यही है .कारण तो बहुत है आख़िर कितने के बारे में लोगो को पता है येः बड़ी बात है.खैर जनता तो सबसे आसान साधन है जिसे कोई भी कुछ कर सकता है .अभी देश में लगातार युवा की बात चल रही है .झारखण्ड में भी टॉप युवा ही थे कैबिनेट मेफिर क्यों नही बदलाव आया खेर येः भी बहुत ही लंबे विवाद का विषय है .सिर्फ़ नेता बंननेसे कुछ नही होता है, होता है निःस्वार्थ सेवा की भावना की अगर वही नही है तो सारा कुछ बेकार .देश को बदलने को लेकर काफी बातें होती रहती है लेकिन देश को बदलने के लिया किस चीज़ की जरुरत सबसे ज्यादा है वो किसी को नही पता .जो कभी गावं नही गया जिन्होंने कभी गावं नही देखा क्या बदलेंगे वो सूरत इनकी येः तो वही होगा बिना जाने ही किसी चीज़ के बारे में दिस्कुस्स करना .खैर अब हमारी कोशिस यही होनी चह्यिअकी हम और राज्य को झारखण्ड न होने दे .देश के विकास में एक सही योअग्दान दे .

Sep 14, 2009

आ गया मेरा गावं

दुनिया के रंगों मई रंगा था मेरा बचपन ,न कोई गिले ,न किसी से शिकवे शिकायत
बस खुस रहना ,हँसाना यही तो जिंदगी थी
देखते ही देखते यौवन ने आ घेरा मुझको
मै भी दुनिया से मुखातिब होने लगा
स्कूल पढ़ने से फुरसत ही न रहा
दोस्तों के समय भी घटने लगे
धीरे धीरे एकाकीपन सी आने लगी
फिर एक दिन छुट गया गावं ,छुट गए बचपन के दोस्त
डगर हो गई कठिन ,
दुनिया की भीड़ मे हो गया शामिल शहर महानगर जिंदगी इन्ही के बीच पिसने लगी
गावं अब पुराना सा लगने लगा ,
दोस्तों के नाम ख्यालो मे भी आने से परहेज़ करने लगे ,
फिर एक दिन हो गई शादी , रम गया अपने आप मे
भूलने लगा रिश्ते नातो को
जिंदगी के ढंग ही बदलने लगे
गावं दोस्त तो कब के छुट चुके थे अब छुटने लगे अपने भी
माँ ,पिता ,भाई ,बहन , अब लगने लगे पराये से
याद भी उनकी यदा कदा ही आती थी ,
फिर आ गए घर नए मेहमान
बस फिर भूल गया सारे रिश्ते को
ये बीते ज़माने से लगने लगे ,
अपने भी कोसो दूर हो गए
बढ़ता गया जीवन , बढ़ती गई दुरी
गावं ,समाज ,माँ ,बाप तो कब के छुट चुके थे
अब छुट गई वो भी
बड़े हो गया नन्हे मेहमान
लेकिन वो भी दिल से दूर जाने लगे
उनकी भी हो गई नई जिंदगी
अकेला हो गया मैं ,
फिर याद आया गावं ,बचपन और बचपन के अल्हड़पन भरे दिन ,
एक कसक सी उभर आई दिल मे
याद आने लगे रिश्ते ,नाते ,अपने
पास जाने को करने लगा दिल अपनों के बीच
मगर चाह कर भी नही जा सका
टूट गए सरे अरमान ,
छुट गए सरे दिल ऐ साजो सामान
फिर न रहा पास वो शाहर ,न रहे शाहर के चाहने वाले लोग
फिर चल पड़ा एक दिन मैं , एक अंजानी राह पर
मंजिल का पता नही पर बस चल पड़ा
छुट गई शाहर की जिंदगी
रास्ते मे याद आने लगे अपने
अपनों के बीच पाने को बेताब होने लगा मन
दिल चाह कर भी उनसे दूर न जा सका
फिर आ गई याद गावं की ,चल पड़ा राह वो अनजान छोड़
उस राह पर ,जहाँ था गावं मेरा
थे मेरे अपने नाते -रिश्ते ,थे मेरे अपने दोस्त यार
जम गई फिर वही महफिल ,
और फिर आ गया मेरा गावं ,आ गया मेरा गावं

Sep 13, 2009

तिरंगा हमारा शान


देश की आजादी को हम किसी भी कीमत मैं खोने नही देंगे .हम लोगो मैं येः भावना होनी चाह्यिया की हम किसी भी कीमत पर अपने तिरेंगे की शान को झुकने नही देंगे .हमें एक प्रतिज्ञा लेनी होगी की जो भी हो अगर कोई तिरेंगे के बारे मैं कोई ग़लत बात करेगा तो या तो उसका सर होगा य़ाःफिर हमारा . अगर आप एक सच्चे भारतीय है तो आज ही मेरी बात पर अपनी एक टिपण्णी जरूर दे .देश हमारा है हम किसी भी कीमत पर इसका आपमान नही सह सकते चाहए कुछ भी हो जाए .
सायद आज हम यह सोचने लगे है की दुनिया सिर्फ़ नए नए फैशन का हो गया है .हमारा सोचना भी बिल्कुल सही है लेकिन सायद हम हमे यह नही भूलना चाहिय की देश मैं अभी भी सभ्यता संस्कृति मौह्जूद है .नारी का जो शौन्द्रय साडी और गहनों मैं अच्छा लगता है सायद वो किसी और परिधान मैं अच्छा नही लगता है .आप बतायिया क्या मैं कुछ ग़लत कह रहा हु आपके अनुसार क्या होना चाहए .................................................

Sep 12, 2009

देश तो हमारा आजाद हो तो गया लेकिन हमारी मानसिकता अभी तक नही बदली है,आए दिन ऐसी घटनाये होती रहती ही की हम चाह कर भी कुछ नही कह पते है.चाहे किसी महिला के साथ बलात्कार हो जाए किसी बच्चे को जबरदस्ती तरह तरह की यातनाए दी जाए!हमारा तो बस कम ही है घटनाओ को देख कर अपना मुह मोर लेते है!आख़िर कब तक हम ऐसे ही सहते रहेंगे !आख़िर हम कब कुछ कहंगे !तब जब हमारे ऊपर ऎसी किसी तरह की घटनाये होंगी,...............................................................................आप अपने विचार जरूर दे !आपके विचारो की सख्त जरूरत है !

Feb 11, 2009

youths

dear
it was quite clear from the 20-20 match played between india and srilanka that youths can change everything.in the last moment of the game the pathan's take the match away from the lankan's,this is how we can done any things on the same basis but only a serious effort be needed.we can drove the air in favour of us by practicising by our effort,without it we can't do anything.

Feb 8, 2009

for the youths

dear,

you all very well know that the standard of politics in our country goes dirty day to day.and it would be well only when you all had take active part in it.nowdays it has been seen that very few youth wants to join the politics,even they had't take interest.and due to this region the condition became critical day by day.and no doubt in saying it that it would de more.so i request you that at least participate in it and make the feet of country strong.thank you and have a desire for your good future.