Jan 16, 2010

गोविंदाचार्य का नया बयान और वास्तविकता ?

कभी बीजेपी के थिंक टैंक रहे और अब राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन के संयोजक  के.एन.गोविन्दाचार्य ने फिर से एक बार राष्ट्रीयता का मुद्दा उठाया है |इस बार गोविन्दाचार्य ने यह कहते हुए संविधान में संशोधन की बात की है की ,देश के प्रमुख संवैधानिक पदों(जैसे राष्ट्रपति ,प्रधानमंत्री ,सेना के जनरल ) पर केवल भारतीय मूल के लोगो को ही नियुक्त करना चाहिए |गोविन्दाचार्य ने इसके लिए आवश्यक  संविधान संशोधन करने की भी बात उठाई है साथ ही इस पर भी जोर दिया है की संविधान में आमूल -चूल परिवर्तन के लिए एक नई संविधान सभा गठित की जाए| गोविन्दाचार्य के इस बयान को एक बार फिर से सोनिया गाँधी से जोड़ कर देखा जा रहा है |लेकिन मैं इस बात पर गोविन्दाचार्य जी के बयान की सराहना करता हूँ ,इन्होने सही बात कही है |आखिर में जो देश का ही नहीं है वो देश को सही से चला कैसे सकता है ,वो देश को अच्छे से समझ ही नहीं सकता है |जहाँ तक मेरी सोच है तो मैं कहना चाह रहा हूँ की देश के संवैधानिक पदों पर सही में देश के ही किसी व्यक्ति को आसीन होना चाहए |क्या हमारे इतने बड़े विशाल देश में अच्छे और योग्य लोगो की कमी हो गयी है जो की हम दूसरी तरफ देखें |आज अमेरिका के सिलिकॉन वैली को भी भारतीय दिमाग ही चला रहे है तो फिर हम दूसरे की तरफ किस कारण से देखें |एक तरफ तो हम अपने संस्कृति और धरती माँ को महान बताते थकते नहीं है तो दूसरी तरफ हम क्या अपनी इस धरती के लालो को ही सही सम्मान दे पा रहे हैं ?यह प्रश्न कुछ लोगो को ख़राब और बिल्कुल गलत लग सकता है ,कुछ को लग सकता हैं की यह तो सिर्फ राजनीती का एक हिस्सा है पर मैं इससे राजनीती से नहीं अपने आप को एक आम देशवासी होने से जोड़ कर देख रहा हूँ |हम अपनी देश की पूजा करते हुए बड़े हुए ,एक सपना लेकर बड़े हुए लेकिन जब सपना पूरा होने का समय आया तो कोई बाहरी आकर उसपर आसीन हो जाए तो मैं सही में पूछता हूँ कैसा लगेगा? मुझे तो बड़ा ही ख़राब लगेगा ,मैं सोचूंगा की आज मुझे अपनों ने ही धोखा  दिया |अपने देश में इतनी प्रतिभा है और हम दूसरे की तरफ देखे तो एक अजीब सी बात नहीं लगती |मैं अंत में ज्यादा तो नहीं बस यही कहना चाहूँगा की अगर इस चीज़ के लिए संविधान में कुछ संशोधन की जरूरत है तो अवश्य  किया जाए |भारत को  जो समझ ही नहीं सकता वो देश को सही से चलाएगा कैसे ,शशि थरूर इसके सबसे बड़े उद्धरण है |अमेरिका में रह कर न उन्होंने कभी देश के गांवो को जाना न कभी जानने की कोशिश की| मुझे तो एक ताज्जुब भी लगता है की किस कारण से यूपीए सरकार ने उन्हें मंत्री बनाकर रखा है |जिसको देश के आम नागरिक का सम्मान नहीं आता उसे किसी भी पद पर देना खुद अपनी दुर्दशा करने जैसी है |बात सही है जिस देश ने दुनिया को सिखाया वहां आकर कोई दूसरा राज करे समझ से परे है |अंग्रेजो के समय वाली स्थिति फिर आ जाएगी अगर कोई दूसरा आ कर यहाँ शासन करेगा |