Nov 4, 2010


जिदंगी के हर एक अंत में शायद एक नई शुरुआत की भी संकल्पना छुपी हुई होती है। हमें इसीलिए किसी भी वस्तु के खत्म हो जाने से बहुत ज्यादा दु:खी नहीं होना चाहिए। क्योकि जो चल रहा है, उसे बदलने के लिए एक नई शुरुआत की आवश्यकता होती है। हो सकता है कि नई शुरुआत में कुछ समय लगे और यह जोखिम भरा भी हो। परन्तु आखिरकार डर और जोखिम के बाद ही जीतने का मजा आता है।
राजेश शुक्ल....

3 comments:

सलीम ख़ान said...

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं.

Suman said...

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये

kashyaprohit9@gmail.com said...

shukla ji aapko yahn dekhkar ati prashanta huai aapka bahut-bahut dhaynwaad. aapne jo baat kahi hai uska wastwik jiwan me arth nihit hai.vykti jivan me bahut kuch karne ki sochta hai lekin karne ke samay picche hat jaata hai ya purani yaadon me samay bita deta hai.